गर्भ का विकास क्रम

गर्भविज्ञान या गर्भसंस्कार भारत का अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषय है। यह मनुष्य के जीवन के पंचकोशीय समग्र विकास के साथ अभिन्न रुप से जुडा हुआ है।
पूज्य गुरुजीने वर्षो के संशोधन के बाद गर्भ आह्वान, दिव्य आत्मा अवतरण विधि, गर्भसंस्कार, गर्भ का विकासक्रम, गर्भ का पंचकोशीय विकास, अंग-प्रत्यंग विकास एवं मन-बुद्धि और चित्त के विकास में गर्भ की भूमिका इत्यादि विषयों पर वर्षों तक चिंतन, मनन, मनोमंथन किया है।
वेद, उपनिषद्‌, गीता, महाभारत जैसे आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक ग्रंथों, न्याय-वैशेषिक-सांख्य जैसे दर्शनो का सूक्ष्म अभ्यास करके गर्भस्थापन-धारण की प्रक्रिया को हृदयस्थ कर के एवं वेदों के विविध सूक्त, उपनिषदों के मंत्रो द्वारा गर्भावस्था में अभिमंत्रण की विविध विधियाँ बताई गई है।

गर्भ में बच्चा हो तब उसके संपूर्ण सर्वांगीण विकास के लिए माता की भूमिका पर निरुपण किया, वेदों के सूक्त, उपनिषदों के विभिन्न सूक्त के द्वारा दिव्य आत्मा का अवतरण संभव है, यह बात कई प्रयोगो के द्वारा साबित किया है। गुरुवर्य के इस प्रयोगों का संकलन ‘मंत्रौषधि गर्भसंस्कार’ नाम से प्रसिद्ध है। ‘संस्कृति आर्य गुरुकुलम्‌’ का मूल ही गर्भसंस्कार है। गर्भविज्ञान यह समज और बुद्धि के स्तर पर Convincing के लिए है। एवं समज-मन-बुद्धि की स्वीकृति के बाद गर्भसंस्कार का अर्थ उसके अमलीकरण का एक भाग है। जहाँ-जहाँ भी औषधीयों का या मंत्रों का अमल होता है, वह भाग संस्कार का आता है । इसीलिए संस्कार का यह भाग ‘संस्कृति आर्य गुरुकुलम्‌’ के द्वारा विशिष्ट रुप से संशोधात्मक और शास्त्रीय रुप से प्रतिपादित किया जाता है।
गर्भ के संलग्न किसी भी विज्ञान की उपेक्षा न हो इसलिए गर्भ से सम्बंधित सभी विज्ञानो का निरुपण यहा विविध ब्लोग के जरिए किया गया है। जिस कारण वाचकगण उसमें से जानकारी लेकर, हो सके उतनी अधिक विधि को अपनाकर ज्यादा से ज्यादा लाभ प्राप्त कर सके। गुरुवर्य श्री विश्वनाथजी के संपूर्ण मनुष्य जाति के पंचकोशीय विकास के इस अभियान में आप भी सामिल होकर इस पृथ्वी पर विराट के अवतरण में सहभागी होकर पूण्य प्राप्त कर सकते है।
हमारा संकल्प है कि, भारत में एक भी बच्चा गर्भसंस्कार के बीना न रहे, एवं एक भी दंपति गर्भविज्ञान के ज्ञान से वंचित न रहे, तो गर्भस्थ शिशु के लिए गर्भसंस्कार एवं माता-पिता के लिए गर्भविज्ञान का उत्तम संयोजन ही दिव्य आत्मा अवतरण का साधक है।

आईए बच्चे के हरेक मास के विकास के बारे मे लेते है संक्षिप्त जानकारी