Vat Rog Har Syrup

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Vat Rog Har Syrup

120.00

Net Volume : 200 Ml.

विशेष :

सिरप में चीनी का उपयोग किया जाता है, जो शरीर के लिए हानिकारक है । जब की हमारे सिरप में प्राकृतिक खड़ी शक्कर का उपयोग क़िया गया है, जिसका कोई हानिकारक प्रभाव ना  होने से निर्भयता से ली जा सकती है ।

आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ यह ३ दोष बताएँ गएँ हैं । शरीर का स्वस्थ होना या न होना इसका मुख्य आधार इस तीनों दोषों पर आधारित है । यह तीनों दोष सम अवस्था में होने पर शरीर को स्वस्थ रखते है किन्तु यही दोष अगर विकृत हो जाते है तो विविध प्रकार के रोगों की उत्त्पति करते हैं । आयुर्वेद के ग्रंथों में वायु के विकृत होने के कारण होनेवाले रोगों की संख्या ८० बताई गई है । प्रकुपित वायु अपने स्थान को छोड़कर शरीर के अन्य अवयवों में पहुँचकर गृध्रसी, साइटिका, पक्षाघात, संधिवात, आमवात, कंपवात, शूल, निद्रानाश, भ्रम, मूर्च्छा आदि रोगों की उत्त्पति करता है । संस्कृति आर्य गुरुकुल ने आयुर्वेदिक ग्रंथों में बताई गई विविध वातनाशक औषधियों का मिश्रण करके “वात रोग हर सिरप” क निर्माण किया है, जो सभी प्रकार के वातज रोगों में लाभदायी है ।

Ayurveda has three doshas – vaata, pitta, kapha. Health of the body or its illness is dependent on the balance of these three doshas. In balanced state, they keep the body healthy but if these doshas are imbalnced or contaminated then it gives way to various diseases. Ayurveda scriptures mention about 80 types of diseases caused by imbalance of Vaayu. Polluted Vaayu leaves its residing place and moves to other parts of the body, and causes diseases like sciatica, paralysis, ischialgia, arthiritis, rheumatism, trembling, pain, insomnia, unconsciousness, illusion,etc. Sanskruti Aya Gurukulam has prepared this vaat rog har syrup using vaat ailment medicines as prescribed in Ayurveda. It is good for all kinds of vaataj ailments.

Category:

Description

CONTAINS  : Each 5 ml

Maha Rasnadi Kwath: 200 mg

Dashmool kwath: 70 mg

Shallaki: 150 mg

Punarnava: 70 mg

Ajawain: 70 mg

Ashvagandha: 70 mg

Nirgundi: 40 mg

Sunthi: 40 mg

Hingu: 2 mg

लाभ :

  • शल्लकी और निर्गुण्डी उत्तम वातशामक, वेदनाहर और शोथहर है ।
  • शुण्ठी नाड़ी संस्थान को उत्तेजित करता है, और उत्तम आमवातहर होने सें आम और वात के कारण उत्पन्न व्याधि दूर होते हैं ।
  • हिंग (सहस्त्रवेधि- हजारों रोगों को दूर करनेवाली) रक्त का संचरण बढ़ाती है और संज्ञानाश, पक्षाघात, गृध्रसी आदि में बहुत लाभदायी है ।
  • अश्वगंधा जो अश्व के समान शक्ति प्रदान करती है और मूर्च्छा, भ्रम, अनिद्रा आदि को दूर करती है ।
  • पुनर्नवा “शरीरं पुनर्नवं करोति” अर्थात जो शरीर को नया बनाये । यह उत्तम रसायन, शोथहर और रक्तवर्धक है ।
  • अजवाईन दीपन, पाचन, रोचन और वातानुलोमन होने से वात की वृद्धि को रोकता है और बढ़े हुए वात को दूर करता है ।
  • महा रास्नादि क्वाथ सभी प्रकार के वातज रोगों में बहुत लाभदायी है ।
  • यह सभी औषधियाँ प्रवाही रुप में एकत्र होने के कारण शीघ्र लाभ पहुँचाती है ।

सेवनविधि :

सुबह-दोपहर-शाम भोजन के बाद २-२ चम्मच समभाग पानी के साथ लें ।

Additional information

Weight 0.057 kg
Dimensions 5.8 × 15.4 cm