Triphala Vati

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Triphala Vati

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गुठली बिना के हरड़, बहेड़ा, आँवला इत्यादि युक्त है ।

आयुर्वेद के प्राय: सभी ग्रंथो में त्रिफला का महत्व बताया गया है । आयुर्वेद के ग्रंथो ने त्रिफला को रसायन बताया गया है ।  यह नित्य सेवनीय होने के कारण कोई रोग न हो तब भी इसका सेवन कर सकते है । त्रिफला में प्रयुक्त हरीतकी, बिभितक और आँवला तीनों द्रव्य त्रिदोषनाशक है इस लिए विविध रोगों को दूर करते है और सम्पूर्ण शरीर को स्वस्थ रखते है । आज-कल बाजार में त्रिफला में प्रयुक्त द्रव्यों की गुठली को भी साथ में पीसकर चूर्ण तैयार किया जाता है, जो शास्त्र और आयुर्वेद के विपरीत है । संस्कृति आर्य गुरुकुलम्‍ में उत्तम जाति के हरड़, बहेड़ा और आँवला को चूनकर उसकी छाल को हटाकर यह चूर्ण बनाया जाता है और उसी चूर्ण की “त्रिफला वटी टैबलेट” बनाई जाती है ।Almost all of Ayurveda scriptures describe the importance of triphala. Triphala is called a rasayan in Ayurveda. Its good for daily use, that is why it can be consumed if there is no ailment or health condition. Its regular use keeps the vital energy regulated. All the minute koshas of body keep getting strengthened which improve their capability. Haritaki, vibhitak and amla, used in Triphala are tridosha-nashak that is why they cure various ailments and keep the whole body healthy. These days the triphala that is generally available in market also contains the kernels (which is grinded with the herbs) of these three dravyas, which is not in accordance with the scriptures and Ayurveda. Sanskruti Arya Gurukulam prepares this churna by griding best quality harad, baheda and amla after removing their bark. That churna is used to make triphala tablet.

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Description

लाभ :

  • त्रिफला पाचनक्रिया को सक्रिय करता है, जिससे वह अजीर्ण, अरुचि, गैस आदि रोगों में उपयोगी है ।
  • आंत्रगत वायु के अवरोध को हटाकर कब्ज को दूर करता है, जिससे अग्निमांद्य, गैस, आनाह, उदावर्त, अम्लपित्त आदि रोगों दूर होते हैं ।
  • त्रिफला के सेवन से रक्त की शुद्धि होने से रक्तगत और चर्मगत रोगों में बहुत लाभ करता है ।
  • त्रिफला केश, त्वचा और आंखो के लिए भी उत्तम है । इसके नियमित सेवन से आँखों की रोशनी बढती है ।
  • इसके नियमित सेवन से वात, पित्त एवं कफ ये तीनो दोष सम रहते हैं ।
  • त्रिफला रसायन होने के कारण स्वस्थ व्यक्ति भी नियमित रुप से इसका सेवन कर सकता है ।

सेवनविधि :

२ से ३ टैबलेट सुबह और रात को गुनगुने पानी या दूध के साथ प्रतिदिन सेवन करें ।

१२ साल से कम आयुवाले बच्चों को आधी मात्रा में औषध दें ।

५ साल से कम आयु के बच्चों को कैप्सूल में से औषधि निकालकर मधु के साथ दें / टैबलेट पीसकर दें ।

सेवनयोग्य व्यक्ति :

१ साल से अधिक आयुवाला कोई भी व्यक्ति इसका सेवन कर सकता है ।

CONTAINS :

गुठली बिना की हरड़, गुठली बिना के बहेड़ा, गुठली बिना के आँवला

Net Volume : 50 Tablets

Who can consume : Anyone above the age of 1 year can consume

Additional information

Weight 0.032 kg
Dimensions 4.8 × 6.2 cm