Mantraushadhi Garbh Suvarnprashan

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Mantraushadhi Garbh Suvarnprashan

500.00

Net Volume : 30 Ml.

Processed in Suvarna Bhasma and Phal Ghrit 

गर्भावस्था में गर्भीणी के स्वास्थ्य के लिए एवं शिशु के मस्तिष्क के विकास के लिए सुवर्ण की विशेष आवश्यक्ता होती है । आयुर्वेद में सुवर्ण की महत्ता बताई गई है । सुवर्ण गर्भवती स्त्री को शक्ति प्रदान करता है एवं गर्भस्त्राव एवं गर्भपात होने से बचाता है । गर्भावस्था में खुराक द्वारा सुवर्ण पर्याप्त मात्रा में नहीं जा सकता है, इसलिए गर्भस्थ शिशु को कमजोरी होती है । गर्भवती स्त्री को शक्ति के लिए विशेष द्रव्यों की आवश्यक्ता होती है । सुवर्ण के साथ वचा का योग गर्भावस्था में विशेष रुप से मन एवं बुद्धि को विकसित करने के लिए उपयुक्त पाया गया है । संस्कृति आर्य गुरुकुलम् अपने ५० वर्षों के संशोधन के बाद यह गर्भ सुवर्णप्राशनम् बनाया है । भारत में सर्व प्रथम पूज्य गुरुवर्य श्री विश्वनाथजी, जो संस्कृति आर्य गुरुकुलम् कें  संस्थापक है । उन्होने यह सुवर्णप्राशन के सेवन करवाकर हजारों महिलओं को स्वस्थ, उत्तम एवं मेघावी संतति की भेंट दी है ।

During pregnancy, gold is specially needed for pregnant lady’s health and for foetus’s brain development. Ayurveda extensively describes the importance of gold. Gold provides strength to the pregnant lady and prevents abortion and effluxion (garbhstrav) during pregnancy. During pregnancy, not enough gold can be provided to the body through regular diet that leads to weakness in the child. Pregnant lady needs special tonics for strength. Use of vacha with gold has been found useful, specially to develop mind and intelligence. Sanskruti Arya Gurukulam has prepared this Garbha suvarnaprashanam after 50 years of research. Pujya guruvarya Shree Vishvanath Datar Shastri ji, who is the founder of Sanskruti Arya Gurukulam, has gifted good health, intelligence and nobility to children of thousands of mothers.

Category:

Description

CONTAINS : Each 10 ml

Shankhpushpi Ext.  250 mg

Pippli Jatamansi Ext. 50 mg

Jatamansi Ext. 50 mg

Vaj Ext. 100 mg

Brahmi Ext. 200 mg

Panch Gavya Ghrit Honey 10 mg

Honey 9 mg

Processed in Suvarna Bhasma and Phal Ghrit

लाभ     :

  • मंत्रौषधि गर्भ सुवर्णप्राशनम से गर्भीणी एवं गर्भस्थ शिशु दोनों के मस्तिष्क का पोषण होता है ।
  • गर्भस्थ शिशु में स्मृतिशक्ति बढ़ती है एवं मनोमय कोश का विकास होता है ।
  • सुवर्ण के कण सूक्ष्म होने के कारण तथा वचा एवं शंखपुष्पी, ब्राह्मी जैसि मेधावर्धक औषधियों के साथ उसका उत्तम योग होने के कारण यह मिश्रण सब से श्रेष्ठ गर्भपोषक है ।
  • सुवर्णप्राशन के नियमित सेवन से गर्भवती स्त्री की पाचन शक्ति बढ़ती है एवं खुराक पाचन होकर शक्ति का संचार होता है ।

सेवनविधि : सुबह-शाम ७ से १० बूँद खाली पेट सेवन करे ।

सेवनयोग्य व्यक्ति : गर्भावस्था के प्रथम मास से शुरु करके प्रसूति तक सेवन करें ।

Who can consume : To be taken by pregnant ladies only, from first month of pregnancy till delivery

Additional information

Weight 0.059 kg
Dimensions 3.4 × 3.4 cm