Liv Raksha Syrup

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Liv Raksha Syrup

120.00

Net Volume : 200 Ml.

विशेष :

सिरप में चीनी का उपयोग किया जाता है, जो शरीर के लिए हानिकारक है । जब की इस सिरप में प्राकृतिक खड़ी शक्कर का उपयोग क़िया गया है, जिसका कोई हानिकारक प्रभाव ना  होने से निर्भयता से ली जा सकती है ।

 

Liver (यकृत) मानव शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है । यह हमारे शरीर की सब से बड़ी ग्रंथि है, जो हमारे शरीर को स्वस्थ बनाये रखने के लिए आवश्यक आंतरिक प्रक्रिया होती है, उसमें सहायक होती है । इसलिए यकृत का रक्षण करना अत्यंत आवश्यक है । आधुनिक समय में भागदौड़वाली जीवनशैली के कारण यकृत के विविध रोगों की उत्त्पति होती है, जैसे कामला, यकृतसोथ, यकृतवृद्धि, प्लीहावृद्धि इत्यादि । संस्कृति आर्य गुरुकुलम्‍ ने विविध आयुर्वेदिक ग्रंथों का अध्ययन करके उसमें बताई गई विभिन्न औषधियों पर कार्य करके “लिवरक्षा” सिरप तैयार किया है । हमारे गुरुकुल के चिकित्सालय में यकृत के मरीज़ों को यह सिरप सेवन कराने पर बहुत लाभदायी सिद्ध हुआ है ।

Liver is a very important organ of human body. It is the biggest gland in our body, which is helpful for the internal process which happens to keep us healthy. That is why it is important to protect the lever. In modern times, due to a hectic lifestyle, various lever ailments develop like jaundice, hepatitis, lever enlargement, spleen enlargement. Sanskruti Arya Gurukulam has researched from various Ayurveda scriptures and prepared this LivRaksha syrup using various medicines prescribed. Use of this syrup in our clinics has given very good results.

Category:

Description

CONTAINS  : Each 5 ml

Plihari: 0.02 gm

Punarnava:0.02 gm

Vidang: 0.02 gm

Guldana: 0.02 gm

Kasni: 0.02 gm

Arjun: 0.02 gm

Pippali: 0.01 gm

Lohasav: 0.06 gm

लाभ :

  • अर्जुन रक्त में से विषैले तत्त्वों को दूर करके रक्त की शुद्धि करता है और यकृत को कार्य में सहायता करता है ।
  • पुनर्नवा यकृत एवं प्लीहा के शोथ को दूर करती है और उसे नयी शक्ति प्रदान करती है ।
  • कासनी पित्तसारक, कटुपौष्टिक और anti oxidant गुण से युक्त है, जो यकृत को शक्ति प्रदान करती है और साथ-साथ मद्यपान के कारण होनेवाले नुकसान से यकृत को सुरक्षित रखती है ।
  • लोहासव शरीर में रक्त और चयापचय की क्रिया को बढ़ाकर शरीर को नयी शक्ति प्रदान करती है ।
  • विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं में उपयुक्त विविध स्त्रावों की उत्त्पति करके चयापचय की क्रिया में सहायता करती है ।
  • पाचक रस का स्त्राव करके पाचनशक्ति बढ़ाकर अजीर्ण, अग्निमांद्य, अरुची आदि को दूर करके भूख बढ़ाती है ।
  • यकृत को शक्ति देकर उसके कार्यों में सहायता करती है और यकृतशोथ, कामला, यकृतवृद्धि आदि बीमरियों को ठीक करती है ।

सेवनविधि :

बच्चो के लिए सुबह-दोपहर-शाम भोजन के बाद १-१ चम्मच समभाग पानी के साथ लें ।

बडो के लिए सुबह-दोपहर-शाम भोजन के बाद २-२ चम्मच समभाग पानी के साथ लें ।

Additional information

Weight 0.257 kg
Dimensions 5.8 × 15.4 cm