Ghee Desi Cow

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Ghee Desi Cow

1,300.00

Net Volume : 1000 Ml.

आयुर्वेद में तथा वेदो में बताया गया है, ‘आयु वे घृतं ’ – अर्थात घी से आयु बढती है, आयुष्य का संरक्षण जैसा घी से होता है, ऐसा किसी भी अन्य वस्तु से नहीं होता । घी का सम्पूर्ण कॉन्सेप्ट भारतीय है और Unique है इसी लिए आज तक कोई भी इसकी कॉपी नहीं कर पाया है । गाय के घी के गुणों के कारण इस से बहुत से विचारक प्रभावित हुए है । घी बनाने की वैदिक एवं आयुर्वेदिक पद्धति है । पहले स्वस्थ एवं वन में चरती गायों का दूध इकठ्ठा किया जाता है, बाद में अम्ल संस्कार यानी दधि मिलाकर मंथन क्रिया करके मक्खन निकालकर छाछ को अलग करके उसके बाद जो घी निकलता है, वो ही है ओर्गेनिक घी । संस्कृति आर्य गुरुकुलम्‍ ग्राम में स्थित होने के कारण चरती गाय का दूध एवं गव्य मिलन सुलभ है, तो ऐसे दूध द्वारा बिलोने से घी बनाते है, जो सर्वश्रेष्ठ कहा गया है ।

Pure Deshi Cow Ghee Made Using ‘Bilona’ Churning Method

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Description

लाभ :

  • नियमित रुप से घी का सेवन करने से ओज की वृद्धि होति है, संपूर्ण शरीर को स्निग्धता प्रदान करके Oiling करता है..
  • दूध से २० गूना शक्ति घृत में होती है..
  • घी परम पित्तनाशक है, इसलिए शरीर की अंदर की गर्मी को दूर करके परम शीतलता प्रदान करता है…
  • घी पेट (कोष्ठ) को शुद्ध करता है, इसलिए नियमित सेवन से पेट के कोई भी प्रकार के रोग नहि होते…

Shastrokt (Vedic) Importance : Sushrut Samhita details all the benefits of cow ghee. It is considered the best ‘rasayana’. Its effect on digestive system and body is sweet and tender and thus treats Pitta.

Relevant Mantra with Translation and Reference (Sanskrit + Hindi) :

विपाके मधुरं शीतं वातपित्त विषापहम् । चक्षुष्यमग्यम् बलयं च गव्यं सर्पिगुणोत्तरम् ॥

Ayurved Vidhan: Sushrut Samhita

Why To consume : The balsamic property of cow ghee is good for joints’ lubrication. It pushes the excess pitta (or heat) out of the body system and keeps eyes healthy. Ghee is very beneficial for vaata and pitta problems.

Additional information

Weight 1.53 kg