Sanskruti
हमारे संस्कृति आर्य गुरुकुलम के अध्यापन कार्य कुछ इस तरह से है
  • गुरुकुल शिक्षा परिचय,
  • गुरुकुल शिक्षा पद्धति का इतिहास,
  • आधुनिक शिक्षा पद्धति का इतिहास,
  • गुरुकुल शिक्षा एवं आधुनिक शिक्षा का हेतु,
  • गुरुकुल शिक्षा एवं आधुनिक शिक्षा की प्रक्रिया,
  • गुरुकुल शिक्षा एवं आधुनिक शिक्षा के परिणाम,
  • गुरुकुल शिक्षा के सोपान,
  • गुरुकुल शिक्षा के विषय,
  • गुरुकुल शिक्षा की विविध पद्धतिया,
  • गुरुकुल शिक्षा में आचार्य की योग्यता,
  • गुरुकुल शिक्षा में माता पिता, अभिभावक की योग्यता,
  • गुरुकुल शिक्षा में छात्र की योग्यता।

गर्भाधान पूर्वचर्या,

पुरुषचर्या,
स्त्रिचर्या,

गर्भाधानके ६ मास पहले आयोजन,

शुद्ध पंचकर्म,
औषधि सेवन,

गर्भाधान संस्कार

१) गर्भाधान संस्कार पूर्व – यज्ञ,

२) मंत्रो उच्चारण विधि,

३) शास्त्रोक्त प्रार्थना,

४) दिव्य आत्मा आह्वान,

गर्भाधान संस्कार बाद पुंसवन संस्कार के लिए 

सेवनीय औषध,
आहार,
विहारकेनियम,

पुंसवन संस्कार के लिए मंत्र एवं यज्ञ,
पुंसवन संस्कार के लिए विविध चिकित्सा पद्धति,

पुंसवन संस्कार के लिए आहार चर्या,
गर्भाधान के बाद सेवनीय औषधि एवं ध्यान देने योग्य बाते,

गर्भावस्था में सेवनीय औषधि,

गर्भावस्था में प्रार्थना,
ध्यान,
गर्भावस्था में गर्भरक्षक के लिए औषधि व मंत्र,

गर्भावस्था में आहारचर्या एवं परहेज,

गर्भावस्था में करने योग्य कार्य,

गर्भावस्था में योगासन,
प्राणायाम व ध्यान,

गर्भावस्था में Healing Therapy,

प्रसूताचर्या

१) Normal Dilivery के लिए विविध उपाय,
२) Normal Dilivery के लाभ एवं Segerian से नुकसान,
३) Normal Dilivery के लिए Emergency उपाय,
४) Normal Dilivery के लिए मन्त्र,
५) Normal Dilivery के लिए विविध चिकित्सा पद्धति,

  • प्रसूति डिलीवरी के बाद करणीय कार्य,
  • शिशुसंगोपन (काश्यप – संहिता) के आधार पर विविध औषोधियों का सेवन ।

 

  • आयुर्वेद की शास्त्रीयता एवं वैज्ञानिकता का संपूर्ण परिचय,
  • आधुनिक – काल में भी आयुर्वेद की उपयोगिता एवं अनिवार्यता,
  • आयुर्वेद की विभिन्न शाखायें,
  • अष्टांग आयुर्वेद दपरिचय,
  • व्यावहारिक एवं सामाजिक आयुर्वेद,
  • चरक, सुश्रुत, वाग्भट, भावमिश्र, इत्यादि ऋषियों के ग्रंथो का परिचय,
  • विविध वनस्पति एवं उनके उपयोग की जानकारी,
  • जीवकाचार्य के जीवन प्रसंग द्वारा आयुर्वेद,
  • राष्ट्रीय चिकित्सा आयुर्वेद,
  • भारतीय जीवनमें गौ की अनिवार्यता,
  • भारतीय संस्कृति में गौ कास्थान,
  • गव्य परिचय,
  • प्रत्येक गव्यका चिकित्सा में उपयोग,
  • पंचगव्य मेंसे औषधि बनानेकी विधि,
  • पंचगव्य व आयुर्वेद कैसे है परस्पर के पूरक,
  • गोपालन आज के भारत की प्रथम सेवा,
  • गोरक्षन एवं वर्धन- पंचगव्य चिकित्साके प्रचार प्रसार द्वारा,
  • सुवर्णप्राशन एक अद्भुत बल औषधि,
  • कश्यप संहिता के आधार पर बनाई गई औषधि,
  • मंत्र एवं औषधिका उत्कृष्ट समायोजन,
  • आयुर्वेदिक Vaccination- No Side effect- No Injection only and only total Health,
  • बालको के समग्र एवं संपूर्ण विकास के लिए अत्यंत उपयोगी औषध,
  • समाज के प्रत्येक बालको को सुलभता से प्राप्त हो इस हेतु से,संस्था द्वारा प्रति माह पुष्यनक्षत्रमें निःशुल्क सुवर्णप्राशन संस्कार केंद्र भारत के विविध स्थानों पर चल रहे है ।
  • उपनिषद के आधार पर पंचकोशात्मक विकास की सरल तथा विस्तृत प्रस्तुति,
  • गुरुकुलशिक्षामें पंचकोश विकास के लिए बताये गई सिद्धांत तथा उसका व्यवहारीकरण,
  • दैनं दिन जीवनमें पंचकोश विकास की संमायोजना,
  • विद्यार्थीयोमें पंचकोश विकासकी अनिवार्यता,
  • आयुर्वेदके अनुसार पंचकोश विकास,
  • पंचकोश विकसित हुए हो ऐसे चरित्रों की दृष्टांत कथाये,
  • पंचकोश की सरल समज के लिए ‘पंचकोश विकास गीत’,
  • गीतामें पंचकोश विकास
  • आयुर्वेद के पंचमहाभूत की संकल्पनाके आधार पर प्रसिद्ध हुए निसर्गोपचार चिकित्सा पद्धति के विषय में शास्त्र सन्दर्भ दे कर उचित मार्गदर्शन,
  • यौगिकषट्कर्मएवंआसानप्राणायामआदिकाप्रायोगिकमार्गदर्शन,
  • उचित पद्धतिसे उपवास तथा अपक्व (कच्चे) आहार लेनेका मार्गदर्शन,
  • पानी, मिटटी, सूर्यकिरण, आदि चिकित्सा पद्धतीयो की जानकारी एवं मार्गदर्शन ।
  • मन की अद्भुत शक्तिके विषयमें शास्त्रोक्त सन्दर्भ,
  • गीतामें मनःशक्ति परिचय,
  • आधुनिक वैज्ञानिको तथा विचारको के मनःशक्ति के विषय में मंतव्य एवं प्रयोग,
  • मनःशक्ति (Mind Power) के उपयोग से कैसे सफल हो,
  • हमारे प्राचीन ग्रंथोमें मन की शक्ति का निरूपण,
  • गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था में केंद्रबिंदु ऐसे आचार्यो का निर्माण करने के लिए समय समय पर विविध स्थानों पर शिविर (Workshop) का आयोजन,
  • आयुर्वेद, भाषा, विज्ञान, दर्शन(तत्वज्ञान),तथा वैदिक गणित जैसे भारतीय विषयो पर जिज्ञासुओं को ज्ञान प्राप्त हो इस हेतु सेमिनार तथा शिविरों का आयोजन,
  • भविष्यमें पुरे भारतमें १००० आचार्यों का निर्माण करने का संकल्प,
  • सभीस्थानों पर लघु-गुरुकुलम का मार्गदर्शन तथा उसके शिक्षक निर्माण करने के लिए प्रक्षिशण तथा अभ्यासक्रम
  • बालिका शिक्षण के लिए विशिष्ट रूप से महिला आचार्या का निर्माण,
  • ४ दिन से ले कर ४० दिनों तक का आचार्या प्रशिक्षण वर्ग
  • निवासी गुरुकुल, अंशकालीन गुरुकुल, लघु-गुरुकुल तथा साप्ताहिक गुरुकुल इन सबके आचार्य गण को सभी विषयोंका मार्गदर्शन तथा प्रयोगात्मक समज,
  • शास्त्रोंमें गृहस्थाश्रम की रम्य कल्पना,
  • भारतीय गृहस्था श्रमकी विशिष्टताएँ,
  • गृहस्थाश्रम में स्त्री-पुरुष का स्थान,
  • घर में सुसंवादिता (Harmony) कैसे बनाये रखे,
  • बालकोकी परवरिश के विषयमें मार्गदर्शन।
  • बालको को घरमें ही पढाने वाले माता पिता के लिए मार्गदर्शन,
  • घर को ही बनाये प्रयोगशाला,
  • विविध खेल तथा मनोरंजन द्वारा शिक्षण,
  • कहानी तथा गीत द्वारा कैसे संस्कार सिंचन करे?
  • संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार हेतु संस्कृत वाङ्मय का अभ्यास करने के लिए इच्छुक जिज्ञासुओं को मार्गदर्शन,
  • देव भाषा संस्कृतका महत्व एवं आवश्यकता समजने हेतु विविध स्थानों पर व्याख्यान प्रवचन का आयोजन ।
  • विशेष रूप से महिलाओं के लिए १ घंटे से ले कर ३६ घंटे तक का अभ्यास एवं प्रशिक्षण वर्ग,
  • सभीप्रकार के धान्य, कडधान्य(दलहन), मसाले, तेल, फल, सब्जी आदि के गुण-दोष का विवरण तथा कालऋतु अनुसार उसका सेवन करने के नियम,
  • विरुद्ध आहार विषयक विस्तृत जानकारी,
  • सामान्य रोगो के घरेलु उपचार,
  • भावप्रकाश निघण्टु ग्रन्थ के आधार पर विविध प्रकार के भारतीय व्यंजन बनाने की शास्त्रीय विधि,
  • आहार ही औषधि – आहार की औषधि के रूपमे समायोजना
  • भारतीय फ़ास्ट फ़ूड,
  • जंकफ़ूड लेने से होते नुकसान,
  • परंपरागत (Traditional Cooking) पाककला ।
  • जीवन के अंतिम पड़ाव यानि वृद्धावस्थाको प्राप्त हेतु लोगोको विधायक दृश्टिकोण तथा आध्यत्मिकता के प्रति झुकाव प्राप्तहो इस हेतु से वृद्धो के संगठन या वृद्धाश्रममें जीवनसंध्या कार्यक्रम,
  • वृद्धोके शारारिक मानसिक रोगो का निःशुल्क उपचार,
  • वृद्धोकी विविध समस्या एवं संकाओँ का उचित समाधान,
  • मनोरंजन द्वारा दयँ एवं ज्ञान द्वारा मनोरंजन के प्रकल्प द्वारा वृद्धोंको निराशा- हताशासे दूर करना।
  • मनुष्यस्वयं के स्वभाव को जाने तथा उसे सुधारने का प्रयास करे इस हेतु व्याख्यान प्रवचन तथा चिंतन शिविर,
  • व्यक्तित्व विकासमें स्वभाव का महत्व,
  • आज के युगमे बढ़ते जाते तनाव के माहोल मे स्वयंको कैसे स्वस्थ प्रसन्न रखे ?
  • आयुर्वेदके अनुसार तनाव-मुक्तजीवन शैली,
  • हमारे शास्त्रोंमें बताये गये तनाव तथा चिंता के शरीर तथा मन पर होनेवाले दुष्प्रभाव,
  • उस दुष्प्रभाव तथा दुष्परिणाम से बचने के सरल उपाय,
  • स्वयंको समय दे,जीवन शांति तथा आनंद प्राप्त करने के उपाय, व्याख्यान,प्रश्नोत्तरतथाकुछप्रायोगिकप्रत्यक्षनिदर्शन।
  • विश्व मान्य अध्यात्म ग्रन्थ गीता के विषयमें युवा जाग्रति लाने हेतु महाविद्यालयोंमें श्री मद्भगवद्गीताजयंती के अवसर पर प्रतिवर्ष भगवद्गीतानिबंध,श्लोक,वक्तृत्व आदि स्पर्धाओंका आयोजन,
  • भगवद्गीतामें समाविष्ट विविध १४ प्रकार के विज्ञानं की विस्तृत समज देते हुए प्रवचन ।
  • युवा भाई-बहनोको स्वावलम्बी बनाने हेतु विविध गृहउद्योग की तालीम (प्रशिक्षण) के Workshop चलाये जाते है,
  • गांव के युवाओं केलिए पंचगव्यमेंसे विविध उत्पाद बनाने की तकनिकी का शिक्षण,
  • ग्राम्य महिलोको सिलाई बुनाई आदि का प्रशिक्षण,
  • शहरी युवानो के लिए लघुउद्योगो की तालीम तथा उनके उत्पादोंके उपयोग के लिए जनता को प्रेरित करना ।
  • पराशर कृषिशास्त्र एवं आयुर्वेद के आधार पर विश्वका सर्व श्रेष्ठ कृषि शास्त्र,
  • कृषि करके ३०% फसल ज्यादा लेने का फार्मूला,
  • बीज की गुणवत्ता बढ़ाने के वेदोक्त उपाय,
  • कृषि-विज्ञानमें अग्निहोत्र का महत्व,
  • कृषिमें विविध वृक्षों को बोने के वेद मे शास्त्रों में बताए गये विविध उपाय ।
  • भगवद्गीतामें पूर्णपुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण ने बताया हुआ सर्व श्रेष्ठ तत्वज्ञान,
  • भगवद्गीता के आधार पर Science of Evolution,

भगवद्गीतामें बताए गये आठ विषय:-

a) Philosophy
b) Psychology
c) Sociology
d) Economics ethics
e) Political Science
f) Astrology
g) Astronomy
h) Ayurved

  • भगवद्गीतामें बताए गये १४ विज्ञानो का विवरण,
  • भगवद्गीतामें आहार- सात्विक, राजस, तामस,
  • भगवद्गीताके आधार पर Personality Devlopment,
  • वाल्मीकि रामायण के आधार पर श्रेष्ठ समाज रचनाके सिद्धांत और उसके व्याहारिक उदाहरण,
  • वाल्मीकि रामायण के आधार पर आदर्श समाज, आदर्श परिवार, आदर्श मनुष्य,
  • व्यक्तित्व विकास करनेके लिए विविध श्रेष्ठतम कथाए,
  • सरलतासे १ से ७ दिनों तक का रामायण प्रवचन प्रति दिन ३ घंटे ७ कांड संक्षिप्त,
  • रामायण के साथ इतररामायण का परिचय,
  • रामायणमें विविध विज्ञानोका समन्वय ।
  • महाभारतमें विभिन्न चरित्रों पर कथा,
  • महाभारतमें विविध शिक्षा,
  • महाभारतमें विविध जीवन उपयोगी शिक्षाए,
  • महाभारतके आधार पर विविध वैज्ञानिक आविष्कार,
  • महाभारतमें गृह शिक्षा, परिवार शिक्षा, समाज शिक्षा,
  • महाभारतमें आयुर्वेद, ज्योतिष, ज्ञान, विज्ञान ।
  • भारतवर्षके लिखेगए सत्य इतिहास पर वेदो से आधुनिक काल तक का सफर,
  • वेदमें वर्णित इतिहास एवं वैदिक काल,
  • मध्यकालीन भारत वर्षका इतिहास,
  • अर्वाचीन भारतवर्षकी घटनाए,
  • इतिहास से शिक्षा,
  • भारतकी ऐतिहासिक भूले,
  • विविध देशोको भारत वर्षका प्रदान,
  • भारतवर्ष का जाज्वल्यवान विज्ञान एवं चिकित्सा का इतिहास
  • व्यास सिद्धांत कथा,
  • श्रीमद्भागवतमें बताए गए भक्तिके सिद्धांत, भक्ति, सामाजिकशक्तिकानिरूपण,
  • श्रीमद्भागवतमें श्रीभागवत यथा स्वरुप एवं विविध उपदेश,
  • आधुनिककालमें उपयोगी भागवत शिक्षाए।
  • भारतीय दर्शन शास्त्र (Indian Philosophy) का परिचय,
  • विविध दर्शन का विवरण तथा प्रकृति की उत्पत्ति तथा आत्मा के स्वरुपके विषयमें विविध मत का निरूपण,
  • दर्शन कर्ता ऋषि-मुनियोंका परिचय तथा उनका कार्य,
  • पंचमहाभूत प्रक्रिया, पंचकोश प्रक्रिया, मुक्तिकी विभावना, आध्यात्मिक विकास करनेके लिए दार्शनिक उपाय इत्यादि विषयो पर व्याख्यान एवं प्रश्नोत्तरी,
  • ३ महीने का डिप्लोमा अभ्यास क्रम (विविध दर्शन शास्त्रोका परिचय),
  • दर्शनशास्त्र Philosophy में पदार्थजगत, मोक्ष, सृष्टिप्रक्रिया, आत्माइत्यादि का विवरण,
  • विभिन्न दर्शनों में मत विभिन्नता तथा मत समानता।
  • अष्टांग योग परिचय,
  • यम-नियमादि की सटीक जानकारी,
  • आसान (प्रायोगिक),
  • बालकों के आसन, महिलाओं के आसन,
  • प्राणायाम (विविध प्राणायाम – प्रायोगिक),
  • धारणा,ध्यान,समाधि (चक्रध्यान),
  • सप्तचक्र परिचय,
  • ऊर्जा (Aura) परिचय एवं विस्तृत अभ्यास
  • विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रोंमें तथा युनिवर्सिटीमें कर्मचारीगण तथा छात्रगण का कौशल्य बढ़ाने के लिए ‘चाणक्यनीति-शास्त्र तथा अर्थ शास्त्र के आधार पर व्याख्यान-प्रवचन,
  • जिज्ञासुओंके लिए कौटिल्य अर्थशास्त्र का क्रमशः अभ्यास,चिंतन शिबिर,सेमिनार,
  • बालकों के लिए सरल भाषा में कहानी,दृष्टांत,उदाहरण द्वारा चाणक्यनीति का शिक्षण।
  • युवाओंको विवाह का जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय शास्त्र के मार्गदर्शनके अनुरूप ले सके इसलिए युवाओं के जीवनमें अमूल्य मार्गदर्शन देनेवाला अद्भुत कार्यक्रम,
  • वर-चयनमें गुण का महत्व,
  • वधू के चयनमें स्वभाव का महत्व,
  • ज्योतिष-स्वभाव विज्ञानं के आधार पर जीवनसाथी चयन करने का मार्गदर्शन
  • बालविकास शिविर (Summer Vacation Camp),
  • महिला प्रेरणा शिविर,
  • विभिन्न क्षेत्रोंमें समय समय पर ३ दिनसे ७ दिन तक की शिविर जिसमे विविध प्रकार के खेल,मनोरंजन के साथ ज्ञानपूर्वक अनेक बाते तथामहिला शिविरमें विविध कलाओका प्रशिक्षण,सबकुछ हसते-खेलते ।

प्रमुख उत्सव:-

a) दीपावली,
b) होली,
c) रक्षाबंधन,
d) जन्माष्टमी,
e) रामनवमी,
f) गीताजयंती,
g) नवरात्री,
h) दशहरा, आदि।

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