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रसोईघर विज्ञान

रसोईघर विज्ञान

Kitchen chemistry}

Kitchen Chemistry Indian Kitchen

मनुष्य का जीवन आहार पर टिका है, मनुष्य की सबसे ज्यादा आवश्यकता हवा, पानी व आहार है। इसमे से हवा व पानी प्रकृति से मिलता है जो हम सीधा ही उपयोग कर सकते है, परंतु आहार जो कुदरत से मिलता है उसे अनेक प्रक्रियाओं से होकर हमारे उपयोगी हो सकते है। आहार को बिना प्रक्रिया किए पशु उपयोग कर सकते हैं क्योंकि उनके शरीर का मेटाबॉलिज्म हम मनुष्यों से अलग है। हम आहार को कुछ प्रक्रिया करके ही पचा सकते हैं, उसको संस्कारित आहार कहा जाता है। आहार को संस्कारित करना भारत देश मे प्रारंभ हुआ, अग्नि की शोध भी प्रथम बार भारत में ही हुई, अग्नि को देवता माना गया। अग्नि अनेक प्रकार के आहारों को रूपांतरित कर सकती है, व अग्नि से सिद्ध होने के बाद आहार के गुण बदल जाते है व वह सुपच्य हो जाते हैं, इसी लिए अग्नि को देवता माना गया और हर घर में अग्नि की आवश्यकता व अनिवार्यता होने लगी। इसी तरह रसोईघर की परंपरा  प्रारंभ हुई। यह केवल रसोईघर ही नही अपितु औषधीयो का अनमोल भंडार है। यदि इस विज्ञान को सही तरीके से उपयोग किया तो वह दुनिया के किसी  औषधालय से कम नही है। इसके लिए आवश्यकता है इस विज्ञान को समझ ने की व समाज मे प्रचार करने की। रसोईघर तो हर एक घर मे होता ही है पर उसे वैज्ञानिक रूप से स्वीकार करने की आवश्यकता है। वैज्ञानिक आधार पर कैसे उपयोग करना है, उसका पूरा वर्णन आयुर्वेद के भवप्रकाष नामक ग्रंथ में दिया है। उसमे रसोईघर की बहुत सी ऐसी बाते बताई गई है जिसका अनुकरण करने से हमारा रसोईघर हमारे स्वास्थ्य के लिए एक अनमोल उपकार हो सकता है। इस वीषय कि विस्तृत जानकारी हम आगे शिविर में करेंगे जिसका नाम है “रसोईघर का विज्ञान”(Kitchen Chemistry)।

Kitchen Chemistry Rasoi Ghar Vigyan

 

रसोईघर में जैसे अग्नि का महत्व है वैसे अनेक पदार्थों का वर्णन है। सबसे पहले इसमे धान्य (Grains) है, सब्जियां, तेल, घी, विविध मसाले इत्यादि जिसका उपयोग हम रोज करते हैं। लेकिन उसका वैज्ञानिक पद्धत्ति से उपयोग करने के लिए कुछ विज्ञान की आवशकता होती है, वह पूरा विज्ञान भारत मे विकसित था। इसलिए यहाँ के मसाले विदेश में जाते थे व भारत का सबसे अधिक व्यापार मसालों का था।

हमारे भारत में रसोईघर का एक महत्वपूर्ण स्थान है। रसोईघर का अर्थ है कि जिस स्थान पर आहार को संस्कारित व रासयुक्त (स्वादिष्ट) बनाया जाए। आयुर्वेद के अनुसार जहा सूर्य का प्रकाश हो, पवन (प्राणवायु)का आवागमन हो, स्वच्छ पानी की सुविधा हो, स्वच्छ व पवित्र वातावरण जहा कोई प्रदूषण ना हो, आदि व्यवस्था हो उसे रसोईघर कहा जाता है।

Indian Healthy Food Sanskruti Arya Gurukulam Rajkot

हम इस सेमिनार में जानेंगे कि आयुर्वेद के अनुसार रसोईघर के लिए स्थान, दिशा का महत्व, भोजन बनाने की विधि, भोजन पकाने वाली अग्नि, भोजन जिसमे पकाते है वह बर्तन, धान्यो में, सब्जियों में, फलों में, तेल में, आदि आहारों में सबसे श्रेष्ठ कोनसे है, उसका उपयोग कैसे करना है, आहार का गुण कैसे बढ़ाए, उसको बनाने में ऊपयोगी बर्तन, भोजन बनाने वाला व्यक्ति, उसके विचार, स्वास्थ्य, स्वच्छता व पवित्रता, भोजन जिसमे परोसते है वह बर्तन, भोजन के जगह पशु पक्षियों का निषध, भोजन बनाने का समय, ऋतू के अनुसार भोजन में बदलाव, भोजन को  कोनसे बर्तन में परोसा जाय, भोजन परोसते समय पालन करने योग्य नियम, भोजन करने के नियम, आदि।

Kitchen Chemistry - Sanskruti Gurukulam Rajkot

रसोईघर पूर्णतः एक वैज्ञानिक प्रयोग शाला है, जिसमे वह ना केवल आहार को जचती है अपितु संस्कारित भी करती है। वह संस्कारित करके हमे स्वास्थ्य दान करती है। रसोईघर एक मंदिर की तरह है। इस विज्ञान को हम समझ कर आचरण में लेंगे तो हमारे देश मे हॉस्पिटलों की आवश्यकता आधे से भी कम हो जाएगी। हम स्वास्थ्य रहकर अनेक रोगों से बच सकते हैं, व घर का भोजन खाकर स्वास्थ्य के साथ सात्विकता भी प्राप्त कर सकते हैं। भगवतगीता में चेतना को ऊपर उठाने वाले खोराख तथा प्रक्रिया का भी वर्णन किया गया है। आदर्श आहार आदर्श प्रक्रिया से बनाया जाए तो ऊत्तम परिणाम मिल सकते है। रसोईघर का महत्व सदियों पहले से रहा है, आज भी हम वापस यह आदर्श रसोईघर विज्ञान को अपनाकर अच्छा आहार व स्वास्थ्य प्राप्त कर सकते है।