गर्भ संस्कार : गुरुकुल निर्माण : आचार्य निर्माण : सुवर्ण प्राशन आदर्श समाज निर्माण का भगीरथ कार्य Best Suvarna Prashan India
Home2020-09-09T13:00:11+00:00

संस्कृति आर्य गुरुकुलम् मे
आपका स्वागत है

पाश्चात्य व्यवस्थाओ में से सबसे ज्यादा कोई निष्फल हो और सबसे ज्यादा नुकसान किसी व्यवस्थासे हुआहो तो वह है शिक्षाव्यवस्था ।

आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के ऐसे दुष्परिणामों को देखते हुए इस शिक्षा पद्धतिका प्रबल विकल्प जरुरी है और वह विकल्प है – सम्पूर्ण आचार्य केंद्रित भारतीय संस्कृतिकी मूल्य आधारित“सर्वांगीण गुरुकुल शिक्षा पद्धति“, सर्वांगीण गुरुकुल शिक्षा ।

अधिक पढ़े

हमारे कार्य

संस्कृति संवर्धन संस्थानम् – संस्कृति,राष्ट्र, समाज एवं भगवद्कार्यको संपूर्ण समर्पित

संतान-उत्पति भारतीय विचारधारामें मात्र कामोपभोगके परिणाम से हुई जैविक-घटना

गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था में केंद्रबिंदु ऐसे आचार्यों का निर्माण करने के लिए समय समय पर विविध स्थानों पर शिविर का आयोजन

बालक को सुवर्ण युक्त औषधि चटाना, अर्थात ‘ सुवर्ण प्राशन ‘। सुवर्ण प्राशन सुवर्ण भष्म, ब्राह्मी, वचा, पीपर, मधु (शहद) तथा नवरत्न कल्पमृत का उत्तम संंयोजन है

गुरुकुलम उत्पाद क्यों बनाता है ?

संस्कृति आर्य गुरूकुलम् पिछले 50 सालोंसे वर्तमान भारत को सुव्यवस्थित एवम् आने वाली पीढ़ियो को वैचारिक रूप सेएवं शारीरिक रूप से मजबूत कैसे बनाया जाए इसके लिए विभिन्नक्षेत्र मे कार्यरत है | आयुर्वेद के क्षेत्र मे संस्कृति आर्य गुरूकुलम् अविरतसेवादे रहा है |

स्वावलम्बनया आत्मनिर्भरता इस ऋषिकुल परम्परा गुरूकुलम् का एक मूल सिद्धांत है।
स्वस्थहोने के लिए असाधारण गुणों और वैज्ञानिक ज्ञान के साथ आयुर्वेद में कई दवाएं (औषधि) हैं लेकिन यह मुख्यधारा में नहींहै या अपने शुद्ध रूप में उपलब्ध नहीं है।

संस्कृति आर्य गुरुकुलम इस भूमि केअंतिम कोने तक ऐसी दवाओं, उत्पादों और ज्ञान को लाने के लिए प्रतिबद्धहै। गौ सन्स्क्रुति के अन्तर्गत ऐसे सभी उत्पाद आप के लिये उपलब्ध कराये गये हैं।

उत्पाद देखे

संस्कृति आर्य गुरुकुलम् में प्रवेश हेतु…

अपने बालको के गुरुकुलम में दाखिला दिलाने के आवश्यक जानकारी एवं दाखिला – पत्र के लिए कृपया यहाँ क्लिक करे।

कृपया यहाँ क्लिक करें

गैलरी

सभी फोटो देखें
सभी विडियो देखें

आयोजन

एक नम्र प्रार्थना…

गुरुकुलम् शिक्षा पद्धति मे छात्रो या उनके माता पिता से कोई फीस या दान नहीं लिया जाता है। यह गुरुकुलम् के पारंपरिक सिद्धांतो पर आधारित है कि भोजन, ज्ञान और दवा बेची नहीं जानी चाहिए। कुछ उदार परोपकारी और धार्मिक संस्थानों द्वारा नकद या इस तरह के योगदान के माध्यम से गुरुकुलम् को बनाए रखने का बोझ उठाया जाता है। संस्कृति गुरुकुलम् भी इसी विचार से प्रेरित एवम् कार्यरत है। आपका संस्कृति गुरुकुलम् को योगदान भारतीय आयकर नियम (८०-जी) से मुक्त है। अगर आपके पास कोई टिप्पणी या सुझाव है, तो कृपया हमें लिखें।